"केला कह सकता हैं दुनिया को अलविदा"

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नई दिल्ली। दुनिया की सबसे ज्यादा खाई जाने वालीपांच चीजों में शामिल केले के खाने के शौकीन औरउगाने वाले किसानों को बड़ा झटका लग सकता है।केले में तेजी से फैलती बीमारियों के चलते अमेरिकीरिसर्चर ने आशंका जताई है कि आने वाले 10 सालों मेंकेले की प्रजाति ही दुनिया से लुप्त हो सकती है।

भारत समेत केला दुनियाभरके 120 देशों में उगाया जाता है।औसतन इसका 10 करोड़ टनउत्पादन भी होता है। भारत मेंतमिलनाडु सबसे बड़ा केलाउत्पादक राज्य है। इसकेअलावा यूपीए महाराष्ट्रए बिहारऔर मध्यप्रदेश समेत कईराज्यों में भी केला बड़े पैमाने परउगाया जाता है। लेकिन जिसतेजी से केले की रकबा बढ़ा हैउससे ज्यादा तेज से इसके पेड़ोंपर नया फंगल यानि बीमारी काप्रकोप हुआ है। अमेरिका मेंकैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी केशोधकतार्ओं ने एसी तीनबीमारियों का पता लगाया है।शोधकतार्ओं की टीम मेंनीदरलैंड के वैज्ञानिक भीशामिल थे। वैज्ञानिको ने दावाकिया है कि ष्सिगाटोकाकॉम्प्लेक्स ष् फंगल इंफेक्शनकेले की फसल को खत्म करनेमें लगा है। ये फंफूद रोग केले केमेटाबोलिक पाथवेज कोप्रभावित करता हैए जिससे केलेके पोषक तत्व और फसल 40प्रतिशत तक गिर जाती है। इसखोज के बाद विश्वस्तर परवैज्ञानिक केले को बचाने केलिए खोज में जुट गए हैं। फंफूदको खत्म करने के तरीके सेईजाद किए ही जा रहे हैं साथही ऐसी वैरायटी भी खोजी जारही हैए जिसमें इन बीमारियों सेबचने की प्रतिरोधक क्षमता हो।फंफूद रोग ष्सिगाटोकाकॉम्प्लेक्स ष् के अंतर्गत येलोसिगाटोकाए लीफ स्पाट औरब्लैक सिगाटोका तीन रोग प्रमुखहैं। इसमें केले का पूरा पत्ता कापीले हो जाता है या फिर तना हीसड़ जाता है। क्योंकि केले काकोई बीज नहीं होता है ये अपनीजड़ ;पुतियोंद्ध से भी पनपता हैइसलिए ये रोग भी जेनेटिक होतेजा रहे हैं। पहले से फूंफदलेकर पैदा होने वाला पौधा बड़ाहोने पर मर जाता है या फिरउत्पादन को प्रभावित करता है।इस रोग से प्रभावित केले में फलपर धब्बे पड़ जाते हैं। सरदारवल्लभ भाई पटेल कृषियूनिवर्सिटी के कृषि वैज्ञानिकडॉक्टर आरएस सेंगर बताते हैंएपश्चिमी यूपी में भी केले की खेतीबढ़ी है। कई किसानों ने रोगलगने की शिकायत की है। हमलोग इसकी काट खोजने में लगेहैं। फिलहाल फंफूद रोकने केलिए हम लोग किसानों कोज्यादा क्षमता वाले कीटनाशकोंके इस्तेमाल की सलाह दे रहेहैं। लेकिन वैसा रिजल्ट नहींमिल रहा है क्योंकि ये फफूंदकेलों की जड़ों से शुरू होती हैएइसलिए चपेट में आए पौधे परकाबू पाना मुश्किल हो जाता है।